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Difference between 2 stroke and 4 stroke engine in hindi

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Difference between 2 stroke and 4 stroke engine in hindi- मोटर वाहनों के इंजन साल दर साल बदलते गए है लेकिन आज भी दो मुख्य गैसोलीन संचालित इंजन प्रयोग में लाये जाते है 2-स्ट्रोक और 4-स्ट्रोक। लेकिन क्या आपको पता है की क्या अंतर होता है 2-स्ट्रोक और 4-स्ट्रोक इंजन में? लेकिन उससे पहले कुछ मुख्य बाते आपको जाननी चाहिए जिससे आप इन दोनों के बीच का अंतर समझ सके-

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What is engine stroke?

सबसे पहले हमको जानना होगा कि एक इंजन में Engine stroke क्या होता है? इंजन के दहन चक्र (combustion cycle) के दौरान, पिस्टन सिलेंडर के भीतर ऊपर और नीचे चलता रहता है। पिस्टन जब सिलिंडर के सबसे ऊपर होता है तो उसे TDC(Top dead centre) और जब सबसे निचले सिरे पर होता है तो उसे BDC( Bottom dead centre) कहते है। एक स्ट्रोक तब होता है जब पिस्टन टीडीसी से बीडीसी तक जाता है, या इसके विपरीत बीडीसी से टीडीसी तक जाता है। प्रत्येक चक्र में पिस्टन द्वारा तय की गई दूरी को स्ट्रोक की लम्बाई या Stroke length कहा जाता है। जब पिस्टन सिलेंडर के भीतर ऊपर और नीचे चलता है तो इस दौरान इंजन को 4 प्रकार के काम करने होते है-

1.Intake-    

पिस्टन जब सिलिंडर में नीचे जाता है तो दहन कक्ष में चार्ज( एयर+ फ्यूल का मिश्रण) प्रवेश करता है इसे Intake Stroke बोलते है इस दौरान Intake Valve खुलता  है।  

2.Compression-

दूसरे stroke में; पिस्टन जब में सिलेंडर की ओर जाता है तो ; इनटेक वाल्व को बंद कर दिया जाता है ताकि गैसों को संकुचित(Compressed) किया जा सके इसे Compression Stroke कहते है इस दौरान Intake Valve और outlet valve दोनों बंद रहता है।

3. Combustion

यह तीसरा stroke होता है इस दौरान Compressed की हुई गैसों को स्पार्क देकर जलाया जाता है इस लिए इसे पॉवर स्ट्रोक भी कहा जाता है इस दौरान intake valve और outlet valve दोनों बंद होते है।

4. Exhaust

यह चौथा और सबसे आखिरी स्ट्रोक होता है इस दौरान intake पोर्ट बंद रहता है और outlet पोर्ट खुलता है जिससे जली हुई गैसे बाहर निकलती है।

स्ट्रोक को एक रेवोलुशन(revolution) माना जाता है – इसलिए जब आप आरपीएम(RPM) शब्द सुनते हैं, तो इसका मतलब है कि यह एक पूर्ण इंजन रेवोलुशन है – या प्रति रेवोलुशन चार स्ट्रोक। इसलिए, जब एक इंजन 1,000 RPM पर क्रियाशील है, तो इसका मतलब है कि आपका इंजन चार-स्ट्रोक की प्रक्रिया को प्रति मिनट 1,000 बार करता है।

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Difference between 2 stroke and 4 stroke engine-

2-Stroke Engine4-Stroke Engine
क्रैंक शाफ़्ट के 1 चक्कर लेने पर एक पॉवर स्ट्रोक होती है। क्रैंक शाफ़्ट के 2 चक्कर लेने पर एक पॉवर स्ट्रोक होती है।
2-स्ट्रोक इंजन में पोर्ट होते है जो इसे सरल बनाता है। इंजन डिजाईन वाल्व मैकेनिज्म के कारण थोडा जटिल होते है जो गियर और चैन के माध्यम से संचालित होते है।
2-स्ट्रोक इंजन हलके होते है। 4 स्ट्रोक इंजन तुलनात्मक रूप से भरी होते है।
इंजन की आउटपुट कम होती है। इंजन की आउटपुट ज्यादा होती है।
यह इंजन 4-स्ट्रोक इंजन की तुलना में गर्म चलते है क्युकी इनमे हर दुसरे चक्र में एक पॉवर स्ट्रोक होती है। यह इंजन 2-स्ट्रोक इंजन की तुलना में जल्दी गर्म नही होता क्युकी 4-चक्र में केवल एक पॉवर स्ट्रोक होती है. जिससे पैदा हुई गर्मी बाकी के 3 स्ट्रोक में सिलिंडर वाल या कूलिंग सिस्टम तक पहुच जाती है।

Difference between 2 stroke and 4 stroke engine in hindi: 2-स्ट्रोक इंजन के चारो चक्र इन्टेक, कम्प्रेशन, पॉवर और एग्जास्ट, पिस्टन के 2- स्ट्रोक के अन्दर ही पूरे कर लिए जाते है. जबकि 4-स्ट्रोक इंजन में चारो चक्र इन्टेक, कम्प्रेशन, पॉवर और एग्जास्ट पिस्टन के चार स्ट्रोक में पूरे होते है अतः 4-स्ट्रोक इंजन में इन्टेक, कम्प्रेशन, पॉवर और एग्जास्ट के अलग अलग स्ट्रोक होते है. 

 4-स्ट्रोक इंजन का डिजाईन पेचीदा होता है क्युकी इनमे वाल्व मकैनिज्म होता है जो कि गियर और चैन के माध्यम से संचालित होता है लेकिन इस इंजन की आउटपुट ज्यादा होती है क्युकी चारो स्ट्रोक अलग-अलग होते है अतः इसमें फ्यूल पूरी तरह जल जाता है वही 2-स्ट्रोक इंजन में पोर्ट्स होते है इसलिए यह हलके होते है, दोने के अपने फायदे और नुकसान है।

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Pro’s and Con’s-

दोनों के अपने अलग फायदे और नुकसान है यहाँ आपको दोनों तरह के इंजनो के कुछ नफा और नुकसान बताया गया है-

  • जहां तक ​​दक्षता की बात है, 4-स्ट्रोक निश्चित रूप से जीतता है। इसका कारण यह है कि प्रत्येक 4 स्ट्रोक के बाद एक बार ईंधन की खपत होती है और पॉवर तथा एग्जास्ट स्ट्रोक अलग-अलग होने के कारण चार्ज पूरी तरह बर्न होता है।
  • 4-स्ट्रोक इंजन वजन में भारी होते है यह अपने मुकाबले 2-स्ट्रोक इंजन से दोगुना वजन का होता है।
  • 4-स्ट्रोक इंजन ज्यादातर वाटर-कूल्ड होते है वही 2-स्ट्रोक इंजन ज्यादातर एयर-कूल्ड होते है.
  • क्योंकि 2-स्ट्रोक इंजन को उच्च RPM पर चलाने के लिए डिज़ाइन किया गया है, इसलिए वे तेजी से घिसते हैं; 4-स्ट्रोक इंजन आमतौर पर अधिक टिकाऊ होता है।
  • आमतौर पर, 2-स्ट्रोक इंजन उच्च आरपीएम पर अधिक टॉर्क बनाता है, जबकि 4-स्ट्रोक इंजन कम आरपीएम पर अधिक टॉर्क बनाता है, इसलिए भरी वाहनों में 4-स्ट्रोक इंजन का प्रयोग होता हैं।

अब आप समझ गये होते की दोनों के बीच अंतर क्या होता है अब यह आपको तय करना है कि आप  कौन सा इंजन पसंद करेगे ।

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